मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए निवेशकों को किया आमंत्रित
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नई दिल्ली में इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 के दौरान 50 से अधिक निवेशकों को राजस्थान में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। राजस्थान का लक्ष्य 2030 तक 125 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है। वर्तमान में प्रदेश में 51,000 मेगावाट से अधिक स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता है।

राजस्थान को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में देश का प्रमुख निवेश केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 में देश-विदेश के निवेशकों को राजस्थान में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी की उपस्थिति में 50 से अधिक निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठक की। इस दौरान उन्होंने राजस्थान में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी दी।
बैठक में ब्रुकफील्ड, रिन्यू, आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स, जिंदल ग्रुप और अवाडा सहित कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने एक्सपो में राजस्थान के स्टॉल का उद्घाटन किया और उनका अवलोकन भी किया। इस अवसर पर ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी उपस्थित रहे।
2030 तक 125 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि राजस्थान सरकार ने वर्ष 2030 तक लगभग 125 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राजस्थान इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी लागू की है। इसके साथ ही बड़े अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राइट टू यूज पॉलिसी भी जारी की गई है। निवेशकों को राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम 2024 के तहत विभिन्न प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
*राजस्थान में 51 हजार मेगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता
मुख्यमंत्री के अनुसार, राजस्थान में वर्तमान में 51,000 मेगावाट से अधिक स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता है। इसमें 45,000 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता शामिल है।
राज्य सरकार सोलर पार्क, रूफटॉप सोलर, पवन ऊर्जा, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की कार्ययोजना भी तैयार की गई है, ताकि अतिरिक्त सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा सके और बिजली की अधिक मांग वाले समय में आपूर्ति को बेहतर बनाया जा सके।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी
इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का आयोजन 2 से 5 नवंबर तक 'इन्वेस्ट, इनोवेट, इंस्पायर' थीम के तहत किया गया। इसमें राजस्थान सहित 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया।
आयोजन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और 400 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी रही। एक्सपो में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों से जुड़े प्रोजेक्ट्स और समाधान प्रदर्शित किए गए।
इस समिट का उद्देश्य अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना, औद्योगिक साझेदारी विकसित करना और नई तकनीकों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना है। राजस्थान सरकार की यह पहल प्रदेश में निवेश, रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के नए अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।









